Mithilesh Kumar
Mithilesh KumarCourseLiteraturePoetry
3 Feb 2021·1 min read·

नया सवेरा आया है

नींद खुल गई, आज चिड़ियां की चहचहाट से। कौआ की कांव कांव, जैसे कोई आने वाला है। लगता नया खबर आने वाला है, नींद खुल गई।

एक आशा की किरण, दे गई यह सुबह। कुछ नया होने वाला है, कई नई शरुआत। बदलाव ही प्राकृतिक के नियम है, जाग तू।

एक नया सवेरा आया है, नए दुनिया का निर्माण करे। बनाए ऐसी दुनिया, सभी आबाद रहे। कुछ देर पहले अंधियाली थी, स्वप्न का देरा। जाग गया, नए मौका का अंबार लिए।

नींद भी अच्छी थी, प्यारी सी। नींद खुल गई, आज चिड़िया की चहचहाट से। कौआ के कांव कांव, जैसे कोई आने वाला है। लगता नया खबर आने वाला है, नींद खुल गई।

लग गया मै, दुनिया के दांव पेंच में। सांसारिकता के आपाधापी में, चल पड़ा हूं, नई दुनिया बनाने। वो सपनों का दुनिया, जो कभी स्वप्न थे। नया सवेरा आया है, नए दुनिया का निर्माण करे।

हरेक कदम रखे हम, संभाल के आगे। उठाएं वीरा सबके कल्याण की, एकांकी ना हो। ले जिम्मेवारी अपनी, साथ ही सभी आबाद रहे।

नया सवेरा आया है, नई आशा की किरण के साथ। इसे ना ऐसे जाने देंगे, कर देंगे कई शुरुआत। नए दुनिया का निर्माण करे, सब की आंखो को भर दे नई आशा से।

सब मिलकर हम, आत्मनिर्भर भारत का आगाज करें। चले नई दुनिया बनाए, हम भारत के युवा। सारी दुनिया झुका दे, अपनी परिश्रम से। ले अपनी जिम्मेदारी, लोगो का कल्याण करे।

नींद खुल गई, चिड़िया की चहचहाहट से। नया सवेरा आया है, नए मौकों का अंबार लिए। नए दुनिया का निर्माण करे हम, सब मिलकर। #आत्मनिर्भर #नईदुनिया #नयसवेरा

©#मिथिलेश कुमार