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नेताओं की कला
बारिश में पौधों को पानी देना क्या कम बला है ! ये हमारे नेताओं में पाई जाने वाली एक अनूठी कला हैं ?
दोहरा है जीवन इनका कुल षडयंत्रो से भरा-पूरा ! मनमोहक अंदाज़ से इनके आम-जन खूब छला हैं ?
करते नित्य प्रति कर-वंदन जय-घोषों से कान भरा है ! चुनाव बीत गए दिन चार फिर किसका हुआ भला है ?
रोज़गार, उद्दम, व्यवसाय ये सब कागज़ी बला हैं ! सूखे पत्तों सा देश बना देखो कैसे हर पृष्ठ जला है ?
©#कुमार
