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Mithilesh Kumar
Mithilesh KumarCourseLiteraturePoetry
3 Feb 2021·1 min read·

नींद लंबी है आजकल

नींद लंबी है आजकल, रात है छोटी। भागदौड़ का तांता, जीवन है छोटी।

घिरे है हम, बनाई झूठी मापदंडों से। हमारी आदत बिगड़ गई, सोचने का तरीका।

अब तो मानव की पहचान तौली जाती, पैसा से। उनका किया, नैतिकता की डोर है थामे।

पैसा का प्यास ऐसी है, गला रेतने बैठे। सोना की है बढ़ती कीमत, जीवन है फिकी।

नींद बड़ी लंबी है अब, जीवन है छोटी। जरूरत पड़ी, सही सोने को पहचाने।

मानवता एवम् नैतिकता की, करे कद्र हम। आर्थिक खाई को पाटे, तोड़े उन मापदंडों को।

खुशियों की कीमत हो, छोड़ उन तुच्छ पैसे का गुमान। लक्ष्य को समझे, स्वार्थी महत्वाकांक्षा को छोड़े।

जीवन समर्पित कर, दूसरो के लिए। उलट दे, उन मापदंडों व नकली सोच को।

बनाए अपने सपनों का भारत, नए विचार से। जहां मानव की कीमत हो, पैसे की नहीं।

पैसा-पैसा छोड़, जीवन मूल्यों को पकड़। पैसा की कीमत है, मानवता की नहीं।

नींद लंबी ना हो इतनी, जीवन ना हो छोटी। चल अपनी शरुआत खुद करे, लकीर खुद खींचे।

जीवन मूल्यों की करे तलाश हम, मानवता विशाल। नींद लंबी है आजकल, रात है छोटी।

#जीवनमूल्य #भागदौड़

#पॉपुलेशन

©#मिथिलेश कुमार