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Amresh Giri
Amresh GiriCourseLiteraturePoetry
3 Feb 2021·1 min read·

पीपर की टहनियों पर कमल

जैसा कर्म करोगे वैसा फल ही मिलेगा, पीपर की टहनियों पर कमल नहीं खिलेगा।

जैसा बीज बोवोगे वैसा ही काटोगे, नीम की टहनियों पर आम नहीं पाओगे।

कर्म जैसा करोगे वैसा ही फल पाओगे, बुरा कर्म करके तुम बहुत ही पछताओगे।

पाप कर्म करोगे तो चेहरा छुपाओगे, अच्छे कर्म करोगे तो चेहरा दिखाओगे।

राम और रावण में बस इतना ही अन्तर था, राम अच्छाईयों के लिए तो रावण बुराइयों के लिए जाना जाता था।

कर्मों से होती है सबकी पहचान, एक नाम के होते है हजारों इन्सान।

अच्छे कर्मों से ही पहचाने गये कई इन्सान, कोई हुए अटल तो कोई बने अब्दुल कलाम।

अच्छा कर्म करोगे तो अच्छा ही फल मिलेगा, बुरे काम का तो बुरा ही नतीजा मिलेगा।

कर्म ही धर्म की पहचान बताता है, अधर्म का तो विनाश हो जाता है।

कर्म से ही पाण्डवों और कौरवों की थी पहचान, धर्म की हुई थी विजय अधर्म का हुआ विनाश।

जैसा कर्म करोगे वैसा ही फल मिलेगा, पीपर की टहनियों पर कमल नहीं खिलेगा।

कर्म की परिभाषा क्या है ये गीता में मिलेगा, जो गीता पढेगा वो कर्म को समझेगा।

कर्मों की कुशलता ही योग कहलाया है, जिसने गीता पढ़ी उसने कर्म को समझ पाया है ।

नाम कैसा है ये मायने नहीं रखता है, कर्म कैसा ये सब कुछ मायने रखता है।

कर्म जैसा करोगे वैसा ही फलमिलेगा, पीपर की टहनियों पर कमल नहीं खिलेगा। ©#अमरेश गिरि