संकल्प की शक्ति को समझें ।
अक्सर हम बच्चे,युवाओं और वयस्कों को कहते हुए सुनते है, कि नववर्ष में उन्होंने संकल्प लिया है । संकल्प लेना कोई बङी बात नहीं है, लेकिन इस पर अडिग रहना मनुष्य को 'नर से नारायण' बनाता है ।
संकल्प कब टूटता है -
- कार्यो को दुसरे समय के लिए टाला जाता है
- दोस्तों के साथ अत्यधिक मौजमस्ती व गप्पें करना
- सोशल मीडिया को जीवन मे प्रथम स्थान देना
- फिल्म देखना
- विकल्पों की तलाश इत्यादि ।
संकल्प को शक्ति कैसे बनाया जाए -
- छोटा- छोटा संकल्प लें और उसे पूरा करें ।
- एक डायरी ले और उसमें अपने प्रतिदिन के कार्यों का विवरण लिखें, जिससे आपको आजीवन प्ररेणा मिलेगा ।
अन्त में दो टुक -
करत-करत अभ्यास के जड़मति होत सुजान । रसरी आवत-जात के, सिल पर परत निशान
अर्थात: जिस प्रकार बार-बार रस्सी के आने जाने से कठोर पत्थर पर भी निशान पड़ जाते हैं, उसी प्रकार बार-बार अभ्यास करने पर मूर्ख व्यक्ति भी एक दिन कुशलता प्राप्त कर लेता है ।
अभ्यास से व्यक्ति 'संकल्प को शक्ति' बनाते हुए अपने उद्देश्य को प्राप्त करता है । और 'साधारण से महानतम तक' पहुंचता है । जैसेे : महात्मा गाँधी, मदर टेरेसा इत्यादि ।
आशा करता हूँ कि आपको मेरा लेख पसंद आया होगा ।
©#नरेन्द्र प्रसाद निराला
