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Akarshit Maurya
Akarshit MauryaCourseLiteraturePoetry
3 Feb 2021·1 min read·

पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य

एकता और समता से युक्त, एक मिसाल है गुरूवर। प्रियभाषी व धर्मप्रेमी गायत्री माँ के, लाल है गुरूवर॥

स्वतन्त्रता संग्राम में बन सेनानी वो श्रीराम मत्त है गुरूवर। देश की सेवा में पूर्ण कल्ब से जुड़ ऐसे देश भक्त है गुरूवर॥

अज्ञान-अन्धकार की घटाओं को छाँट, ज्ञान का प्रकाश है गुरुवर। वाणी जिनकी विस्मृत न हो, वाकेन्द्रिय युक्त ऐसी मिठास है गुरुवर॥

जिनके विचार ही अपवर्ग का मार्ग हों, ऐसे सुविचार है गुरूवर। देह होकर भी विदेह मुक्त है, जैसे मिथिला कुमार है गुरूवर॥

आप ही ब्रह्मा विष्णु हो, आप ही कृपानिधान है गुरूवर। इस गूरूपूर्णिमा के अवसर पर आपको शत्-शत् प्रणाम है गुरूवर॥ Alive words of Akarshit.

©#आकर्षित मौर्य