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मेरे कान्हा
कृष्ण को पाने की ललक छोड़ दो, दिल से ऐसी हर कसक तोड़ दो !
साथ निभाएंगे जीवन भर आपका बस उन्हें प्यार करो और छोड़ दो !
बालपन में माखनचोर मिले राधा को और, रुक्मिणी को मिले द्वारकाधीश !
दोनों के थे प्यार अलग और अलग-अलग आधार बनी रुक्मिणी पटरानी पर राधा के आगे झुकते शीश !
©#कुमार
