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Kumar Bhupesh
Kumar BhupeshCourseLiteraturePoetry
3 Feb 2021·1 min read·

रहबर बनूंगा...

घूंट कड़वे वक्त के मैं सब पीऊंगा, मौत के अंतिम पहर तक देख कैसे मैं जीऊंगा !

राह के रजकण सरीखे छोड़ अब मुझको मिटाना, मील के पत्थर से आगे शिलाखंड तक मैं गढ़ूंगा !

बंदिशें सारी मिटाकर सीढ़ी अंतिम तक चढ़ूँगा, राह की अठखेलियों संग हर एक रहज़न से लड़ूंगा !

देख ले तू आजमा कर आखिरी पग तक बढूंगा, धारणा बाधारहित कर दिन एक रहबर बनूंगा !

©#कुमार