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रहबर बनूंगा...
घूंट कड़वे वक्त के मैं सब पीऊंगा, मौत के अंतिम पहर तक देख कैसे मैं जीऊंगा !
राह के रजकण सरीखे छोड़ अब मुझको मिटाना, मील के पत्थर से आगे शिलाखंड तक मैं गढ़ूंगा !
बंदिशें सारी मिटाकर सीढ़ी अंतिम तक चढ़ूँगा, राह की अठखेलियों संग हर एक रहज़न से लड़ूंगा !
देख ले तू आजमा कर आखिरी पग तक बढूंगा, धारणा बाधारहित कर दिन एक रहबर बनूंगा !
©#कुमार
