← PrevNext →
Rahul Devashish
Rahul DevashishCourseLiteraturePoetry
3 Feb 2021·1 min read·

शेल कंपनियाँ:आर्थिक विकास में बड़ा बाधक

क्या है शेल कंपनी?

'शेल' शब्द का हिन्दी में अर्थ है-'खोखा'।यानि वैसी चीज जिसका एक आकार तो होता है लेकिन अंदर से खाली होता है।इसी तरह शेल कंपनियाँ कागज पर सूचीबद्ध तो होती है लेकिन जमीनी स्तर पर इसका अस्तित्व नहीं होता।ये कर्मचारियों की लिस्ट,बैलेन्स शीट सारा कुछ मैंटेन करती है,लेकिन ये फर्जी होते है।

शेल कंपनी क्यूँ बनाई जाती है?

ब्लैक मनी को छुपाने के लिये,टैक्स चोरी के लिए जैसे कुछ कारण है जिसकी वजह से ये शेल कंपनियाँ बनाई जाती है।

कौन चलाता है शेल कंपनी?

भ्रष्ट राजनीतिज्ञ,भ्रष्ट नौकरशाह,आतंकवादी,ड्रग माफिया,इत्यादि इन शेल कंपनियों को चलाते है।

शेल कंपनी को रेगुलेट करने के क्या वैधानिक प्रावधान है?

भारत की कंपनियाँ कंपनी एक्ट 2013 के तहत रेगुलेट की जाती है।इस एक्ट में शेल कंपनी को न तो परिभाषित किया गया है,न ही इसे रेगुलेट करने के प्रावधान है।

शेल कंपनी से सरकार को क्या नुकशान है?

सरकार को टैक्स नहीं मिल पता।इन कंपनियों की ऑडिटिंग,उनके डेटाबेस मैंटेनेंस में सरकारी लोग और सरकारी संसाधनों का अनावश्यक उपयोग होता है जो अप्रत्यक्ष रूप से नुकशान देह है।ये लोग और ये संसाधन कहीं और लगाए जाते तो उसका लाभ मिलता।

शेल कंपनी से आम जनता को क्या नुकशान है?

जब ये शेल कंपनियाँ टैक्स नहीं देती तो सरकारी रकम जुटाने के लिए सरकार आम जनता पर ज्यादा टैक्स लगती है।साथ ही, सरकारी लोग और सरकारी संसाधनों के अभाव में जनता को गुणवत्तापूर्ण सेवाएँ एवं वस्तुएँ नहीं मिल पाती।

सरकार क्या कर रही है?

हमें क्या करना चाहिए?

हमें सरकार के आँख एवं कान बनना चाहिए।इस तरह की किसी फर्जी कंपनी की सूचना मिले तो सरकार को,पुलिस को हमें बताना चाहिए।सरकार हमारी पहचान को गुप्त रखती है।इसलिए हमें निडर होकर सूचना देना चाहिए।

कठिन शब्द और उनके अर्थ:

  • बैलेन्स शीट:-आय-व्यय का ब्योरा।
  • ऑडिटिंग:-लेखा-जोखा।डेटाबेस:-संग्रहित आँकड़े।