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सिर्फ तुमसे है
हसरतों के मेले में वासता सिर्फ तुमसे है जिंदगी का मैदान बड़ा रास्ता सिर्फ तुमसे है माना हरसु लोग बहुत दे देते हैं शोक बहुत हर्ष के पलों की दास्ताँ सिर्फ तुमसे से है हसरतों के मेले में वासता सिर्फ तुमसे है।
आगे बढा कभी खाई पछाड़ बनता बिगड़ता रहा संसार अनुभवों के बियाबान में गुलिस्ताँ सिर्फ तुमसे है, हसरतों के मेले में वासता सिर्फ तुमसे है।
सच है जब भी हुआ कमजोर थामे रही तुम मन की डोर दूर के किस्सों में पासका सिर्फ तुमसे है, हसरतों के मेले में वासता सिर्फ तुमसे है।
बांध सके कोई मुझे कोई तो ऐसा आ मिले मुक्ति के संग्राम में दासता सिर्फ तुमसे है हसरतों के मेले में वासता सिर्फ तुमसे है
शब्दार्थ:
हरसु-चारों तरफ बियाबान-जंगल
©#रंजीत
