सुनहरी यादें
शुरुआत किया था इस सफर मे अकेले मैंने , आज बहुत सारे दोस्त बना कर जा रहा हूँ, जिनके बिना कक्षाओं में नहीं जाते थे हम, आज उन्हीं दोस्तों के बिना मै घर जा रहा हूँ।
सलामत रखना हमारे दोस्तों को ऐ खुदा, उनकी सलामती मे ही हमारी सलामती है, जहाँ रहे खुशियाँ मिले उनको , गमों के जंजाल मे वो न हो।
सफर बहुत अच्छा रहा हमारा, क्यों कि हमारा साथ अच्छा रहा, दोस्त जा रहे हैं आँखे नम होती जा रही है, उनकी यादें अब दिल में बस्ती जा रही है।
इतनी यादें बन गयी है , कि मै अब अकेला महसूस नही कर रहा हूँ, आया तो था घर से मै अकेला, आज यादें बहुत लेकर जा रहा हूँ।
दोस्त तो साथ नही जा रहे , लेकिन उनकी दोस्ती साथ लेकर जा रहा हूँ, सफर मे अकेला नही रहा मै, क्यों कि सफर को यादगार बना कर जा रहा हूँ।
कोई गलती हो गयी हो मुझसे, तो मुझे माफ कर देना यारों, जाते जाते दिलों से नफरत मिटा देना, जाते वक्त सबको प्यार से गले लगा लेना।
अब हम कहाँ होगे आप कहाँ होगे, ये हमे अब अन्दाज़ा कहाँ है, आँखे नम है हमारी, नये सफर के इन्तजार में हम है।
सबको मिले मंजिल अपनी अपनी, यही खुदा से कामना है, कभी अलविदा न कहना दोस्तों फिर मिलेंगे यही कहना दोस्तों।
©#अमरेश गिरि
