अपने दोस्तों से बात कर गलतफहमी दूर करें
आज मेरी अपने एक पुराने घनिष्ठ मित्र से फोन पर बात हुई। हाय-हेलो के बाद मेरे दोस्त का पहला शब्द था -आप मुझसे नाराज है क्या? मैंने कहा-नहीं भाई, मै नाराज नहीं हूँ।
मित्र- आपकी आवाज से पता चल रही है।
मैं अपनी भावनाओं को छुपाते हुए कहा- नहीं, ऐसी कोई बात नहीं है।
वास्तव में मैं भावनात्मक हो गया था। अगर वह आंखों के सामने होता तो अपनी बाहों में भर कर खूब रोता।
मेरे मित्र योग सिखाते है। मैने मजे लेते हुए पूछा- क्या योग से लोगों की भावनाएं पढ़ी जा सकती है?
मित्र- मैं कुछ हद तक पता कर लेता हूँ।
बातचीत का यह सिलसिला आगे बढ़ा। स्वास्थ्य, परिवार विवाह आदि व्यक्तिगत जीवन के कुछ विषयों पर अपनी बातों का आदान प्रदान हुआ।
अंत में, मैं अपनी मन की बात बताई कि मैं बहुत नाराज था लेकिन अब बहुत अच्छा महसूस कर रहा हूँ । वास्तव में पुराने दोस्तों से बात करने से बीती यादें ताज़ा हो जाती है । आप भी अपने दोस्तों को फ़ोन कर और मिल कर यादें जीवंत करें।
