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Ranjeet Mishra
Ranjeet MishraCourseLiteraturePoetry
3 Feb 2021·1 min read·

टीन एज

मन में मन का दस्तक हुआ, बाल्यावस्था जब स्नातक हुआ ।

फूटा प्रथमतः आवेग प्रबल, मन मन का वाहक हुआ ।

मन-मंदिर में मोहक छवि, मन स्वतःभावक गायक हुआ ।

दृष्टि निज अहरह रूप सवारे, निहारे मन, मन के लायक हुआ ।

दिशाकाश मन मन को भटके , मंजर मन का कष्टदायक हुआ ।

शासित मन मुखरन को तरसे, निसंग मन अतिशय दाहक हुआ ।

©#रंजीत