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Rahul Devashish
Rahul DevashishCourseLiteraturePoetry
3 Feb 2021·2 min read·

अपनी समस्याओं को सुलझाने का सही तरीका

मशहूर हास्य कलाकार चार्ली चैपलिन ने एक बार कहा है-"जब हम अपनी जिंदगी को बहुत ही करीब से देखते है तो यह एक आपदा लगती है,लेकिन इसी जिंदगी को जब हम दूर से देखते है तो यह एक हास्य प्रसंग लगता है।"आपलोगों में से बहुतों ने ऐसा जीया भी होगा। आईये  जिंदगी की भयंकरता और इसकी सहजता पर आज थोड़ा बात कर लेते है।

लोग समस्यायों  से डर जाते है।समस्या आने पर भागने लगते है,रोने-बिलखने लगते है,नशा करने लगते है,और न जाने क्या-क्या करने लगते है।एक बार स्वामी विवेकानंद को बेलुर मठ जाने के रास्ते में कुछ बंदरों ने रास्ते में घेर लिया और उन्हें नोचने की कोशिश करने लगा।विवेकानंद जी घबरा गए और जल्दीबाजी में उन्हें यही सुझा की भाग चलें।वे पीछे मुड़े और भागने लगे।बंदरों ने भी उन्हें खदेड़ना शुरू कर दिया।कुछ दूर पर एक व्यक्ति ने इस दृश्य को देखा।उसने झल्लाते हुए विवेकानंद से कहा-"अरे मूर्ख बालक,भागता क्यूँ है?सामना कर!" विवेकानंद पीछे मुड़े और बंदरों की ओर देखा।उन्होने एक झपट उनकी ओर बढ़ाया तो देखा बंदर पीछे हटने लगे।

हम सबकी समस्याएँ विवेकानंद जी,बंदर जी और व्यक्ति जी से अलग हो सकती है लेकिन समस्या का समाधान एक ही  है और वह है सामना करना।समस्याओं को हमे आमंत्रण नहीं देना पड़ता और न ही समस्या हमारी जिंदगी में सूचना देकर और बाजे-गाजे के साथ आती है।वे तो बिन बुलाये मेहमान कि तरह आती है और अजगर के समान हमारे सामने पसार जाती है।

जब भी समस्या आये उसका तहे दिल से स्वागत करिए जैसे मुगले-आजम में अनारकली सलीम का करती है।अब समस्याओं को विश्लेषित करिए।एक खाली जगह या सादे कागज पर उसे दो भाग में बाँट दीजिये।एक तरफ वैसी समस्या रखिए जो तुरंत (Short Term में)सुलझानी है,दूसरी तरफ वैसी समस्या को रखिए जिसे बाद में (Long Term में)सुलझानी है।

दूसरा काम यह करिए कि सुलझाने वाली समस्याओं का पुनर्वर्गीकरण करिए।एक भाग में वैसी समस्याओं को रखिए जिसे आप स्वयं सुलझाएँगे वहीं दूसरे भाग में ऐसी समस्यायों को रखिए जिसे दूसरे लोग सुलझाएँगे।दूसरे को सूचित करें कि आपका अमुक काम उसे करना है।अगर आपको ज्ञात हो तो उसे तरीका बता दें या अगर आपको कुछ तसल्ली चाहिए तो उनसे सुझाव ले लें।

आप सिर्फ समाधान के बारे में सोचें।पश्चाताप करने से बचें ।अगर कुछ गलतियाँ हो चुकी है ,कुछ नुकशान हो चुका है तो उससे कम-से-कम करने का प्रयास करने का समाधान सोचें।समस्याओं के बारे सोचते रहेंगे तो उसमें उलझते हुए चले जाएंगे।समाधान के बारे में सोचेंगे तो नई रोशनी दिखेगी,नया रास्ता दिखेगा।

आपके हाथ में सिर्फ प्रयास है और कुछ नहीं ।पूर्ण समर्पण के साथ अपना कर्तव्य(Duty) करिए ,उसके बाद होनी के आगे समर्पण कर दीजिये।अगर आप ऐसा करने में सफल हो जाते है तो दुनियाँ के इस रंग-मंच पर अच्छा प्रदर्शन कर पाएंगे और जिंदगी एक हास्य-प्रसंग बनी रहेगी जैसा की चार्ली चैपलिन ने कहा था।