Ashutosh Kumar
Ashutosh KumarCourseLiteraturePoetry
3 Feb 2021·2 min read·1·

आज का दिन मेरा है

वर्तमान एक उपहार है, अतीत एक भ्रम, और भविष्य तो अज्ञात है। इसीलिए इस दिन का उपयोग कर रहा हु मैं, अपनी प्रतिभा के परिष्कार के लिए,अपनी स्वभावविक्ता के विकास के लिए। और साथ ही इस दुनिया को और सुन्दर और सभ्य बनाने के लिए, इसलिए वर्तमान को साध रहा हु मैं,

जब जब डर ने मुझे आँखे दिखाई कभी,मैं अपने सूर्य नमस्कार को दो बार और बढ़ा देता हूं, प्राणायाम की साधना से डर को हरा देता हूं, और अपने अंदर भर लेता हूं सविता का सुनहला प्रकाश , जो कहता है मुझसे की डर मत ,आगे बढ़, आगे बढ़।

जब जब होती है मेरी आलोचना मैं रुकता नहीं ,थमता नहीं, और तेज़ करता हु अपनी गति चलने की, और जब अवरोध हद से बढ़ जाते है,ठहर कर ध्यान करता हु दो घड़ी अचानक वे कम हो जाते है,मैं आगे निकल जाता हूँ।

जब जब थक जाता हूं कभी दौड़ भाग कर, नींबू की चाय बनाकर ,देखता हूं एकांत में डूबते सूर्य को, जो कहता है मुझसे खूब आराम करो ,कल फिर आऊंगा मिलने, मैं सुबह की सैर में,नम्र घास पर उसकी छिटकती किरणों से फिर मिलता हु और भर जाता हूं ,उम्मीद से,।

अब मुझे समझ में आ गया है कि सारी चीजें मांग करती है,एकाग्रता की,समर्पण की,अभ्यास की, एक असाधारण उम्मीद की,एक असाधारण कर्म की, अगर असाधारण बनना इतना आसान होता तो हर कोई होता, पर ऐसा नहीं है,

बाज़ की तरह बनने की तरह ,गुजरनी पड़ती है मर्मान्तक वेदना से, सहने पड़ते है ,अनेक जख्म, अपनी ही चेतना में, हारना पड़ता है अनेको युद्ध, डूबना पड़ता है कई बार सिन्धुराशी में, और हर बार उठाना पड़ता है गांडीव, खुद ही बनकर अर्जुन क्यूंकि कृष्ण अब मिलते नहीं कही,

इसलिए इन रास्तों पर चल पड़ा हु मैं, हर सप्ताह कोई नई पुस्तक पढता हु,नई जगह घूमने जाता हूं, मानवता के अमिट निशानों को ढूढता हु किसी नई जगह पर, और इस तरह अपने जीवन की आधारशिला को और मजबूत करता हूँ हर रोज़, हर एक घंटा ,हर एक मिनट।

इसलिये हर दिन का स्वागत करूँगा आशा से,उत्साह से इसलिए इस साल चलूँगा कुछ और कदम आगे, जहाँ पहले खड़ा था, हर दिन कुछ करूँगा कुछ ऐसा की लोग कहे शाबाश, शाबाश। हर उस साथी का करूँगा आभार, जो मुझे प्रेरित करते है, और मैं भी प्रेरित करूँगा सबको ,

मैं एक सिंह हूँ, भेड़िया जैसी सोच नहीं मेरी, मैं एक बाज हु गिद्ध नहीं, मैं सृजेता हूँ, पिछलग्गू नहीं, मैं विजेता हु,पीड़ित नही। इसलिए मैं गर्व से कहूँगा, आने वाला कल मेरा है,मेरा है।

मेरे पास एक पूरा साल है, मैं खुद को और विस्तारित करूँगा,और संवेदनसील बनूँगा, और स्वस्थ बनूँगा, और मेहनत करूँगा, और अपनी चेतना में भरूँगा उमंग, तरंग और साहस।

तो साथियों वर्तमान हमारा साचा है, मैं खुद को और निडर ,और साहसी बनाऊंगा, इसलिए अपने स्वाभिमान के साथ और सीना ताने चलूँगा, और तैयार करूँगा अपने आलोचक और नए लक्ष्य, इसलिए मैं उदघोष करता हूँ

आज का दिन मेरा है, आज का समय मेरा है, आज का वजूद मेरा है, क्यूंकि मैंने खुद का निर्माण किया है और मुझे पता है कि नाश के भय से दबता नहीं निर्माण का सुख ।