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Mithilesh Kumar
Mithilesh KumarCourseLiteraturePoetry
3 Feb 2021·1 min read·

ट्रैफिक की जमघट

ट्रैफिक की बड़ी जमघट है, निकल गई है हवा। बड़े बड़े ट्रक का तांता है, लगती फटफटी छोटी। चल भला के चक्कर में, गाडियां की तबीयत हो गई खराब। एक राही हाथ बढ़ता, उनको बड़ी जल्दी है। बड़े बड़े ट्रक का तांता लगा है, उनको बड़ी जल्दी है।

गया फटफटिया फंस एक गड्ढे में, कर दी है आवाज। अचानक हुए पंचर, बेचारे मिस्त्री की गुमटी बगल में। हो गया पूरा ट्यूब का कबाड़ा, बदला उसे वहीं। बड़ा दुद्घटना से बच गई, फटफटिया, ब्रेक शु था टूटा। भला करने की भी महत्ता है, होती भला खुद ही।

बना रहे मिस्त्री सब, हो जाएगा सब ठीक। दिक्कत से जिन्दगी कभी रुक नहीं सकती, यही है सीख। जीने में है बड़ा मजा, ट्रैफिक की बड़ी जमघट है। ट्रैफिक की बड़ी जमघट है, निकल गई है हवा। बड़े बड़े ट्रक का तांता है, लगती फटफटी छोटी।

जीवन है तो, समस्या है। चाहे मंजिल, कितनी भी हो दूर। चलना लगातार, बिना रुके। ट्रैफिक की बड़ी जमघट है, निकल गई है हवा। बड़े बड़े ट्रक का तांता है, लगती फटफटी छोटी।

#ट्रेफिक #लाइफ

©#मिथिलेश कुमार