उन्हें कहते हैं गुरू
शिष्यों को जो बड़ी मेहनत से पढायें, उन्हें कहते हैं गुरू। शिष्यों को जो हर "इल्म" सिखायें, उन्हें कहते हैं गुरू॥
काटों से लबा-लब भरा है, मेरे सपनों का सफर। उन्हीं रास्तों पर जो गुलों को बिछायें, उन्हें कहतें हैं गुरू॥
जीवन को भटकाते रहे हर मोड़ पर, हम जीवनभर। ज्ञान की जो सही राह दिखायें, उन्हें कहतें हैं गुरू॥
शिक्षा और विद्या का समावेश, बेहद जरूरी है। विद्या के साथ जो संस्कार सिखायें, उन्हें कहते हैं गुरू॥
कभी-कभी पढाई से, मन ऊब-सा जाता है। शिक्षा को जो मनोरंजन बनायें, उन्हें कहतें हैं गुरू॥
शिक्षक और गुरु में बस इतना-सा, अन्तर होता है। शिक्षक पैसा कमाये और जो ज्ञान लुटायें उन्हें कहतें हैं गुरू॥ Alive words of Akarshit.
©#आकर्षित मौर्य
