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वाणी की शैली
ये सांजिशों का दौर है, अपनी वाणी को संभाला कीजिये। बदलते वक्त के साँचे में, अपनी जुबान को ढाला कीजिये॥
तू-तू,मैं-मैं जैसी तुच्छ बोली से अक्सर सम्बन्ध टूट ही जाते हैं। रिश्तों को बनाये रखना है अगर, तो अपनी वाणी को निराला कीजिये॥
आपकी शैली आपके परिवार की, भाषा को दर्शाती हैl महान बनने की इच्छा है अगर, तो अपनी वाणी का हवाला कीजिये॥
वक्ता बन जब बोलोगे, तब ईर्ष्यालु लोग दबायेगें तुम्हें। राह के काँटों को मिटाना है अगर, तो अपने शब्दों को भाला कीजिये॥
निकृष्ट वाक्शक्ति ही , जीवन के तमस का हेतु है। अन्धकार मिटाने की अभीप्सा है अगर, तो वाणी से उजाला कीजिये॥ Alive words of Akarshit.
©#आकर्षित मौर्य
