विद्याधिष्ठात्रि को नमन
पावन पुनीत दिवस आज, विद्या के अधिष्ठात्री को नमन। सृष्टि संचालक को भी करना पड़ा जिनका वरण। जिनके वगैर ओढ़ ले वसुधा सभी, तिमिर का आवरण। जिनके तेज से होता, अज्ञानता का क्षण में क्षरण। इस जगत् में वीणापाणी का हुआ प्रथम अवतरण। वेद-वेदांग जिनके तेज का प्रकाश है। इस माँ के चरणों से प्रस्फुटित धरा- आकाश है। जिसने स्वयं को वार दिया, वह जीवन में पाया उल्लास है। विद्याधिष्ठात्री के बिना, जीवन ही उदास है। पावन पुनीत दिवस आज, विद्या के अधिष्ठात्री को नमन। चहूओर हुआ धरा सुसज्जित, नवकिसलयों का हुआ आगमन। नव प्रभात संग ,नवरश्मियों से सम्पूर्ण धरा हुआ आनन्दमग्न। छोड़ जीर्ण सीर्ण वसन, धरा -अंबर ने किया नवीनता अर्पण। कण- कण ने किया है यजन, तभी प्रकाशपूंज से जगमग है चमन। पावन पुनीत दिवस आज, विद्या के अधिष्ठात्री को नमन। कलियाँ -कलियाँ खिलखिलाई है ,परिवर्तन की पावन बेला आई है। उमंग, उल्लास का परिधान पहने, समय ने ली अगड़ाई है। धूल धूसरित खेतों ने भी, आज लहलहाते फसलों की महफिल सजाई है। भूल के दुःख -वेदना के क्षण सभी, अधरों पर मुस्कान लाने की बेला आई है। पावन पुनीत दिवस आज, विद्या के अधिष्ठात्री को नमन। पाकर शरण, त्याग सिंहासन शांति, शौर्य, प्रेम सौहार्द का पाठ पढ़ाया। जब महामूढ़ कालिदास आशीष पाया, ज्ञानपूंज से जगत् को जगमगाया। जब बैठी संयासी के अन्तर्मन में, सत्य सनातन के ढंके की गूंज सुदूर प्रांत में गुंजित हो आया। जब बैठी वीरों के मस्तिष्क में, उसने सम्पूर्ण जीवन मातृभूमि को भेंट चढाया।
आप समस्त देशवासियों को उमंग, उल्लास, उत्कर्ष, उत्साह से सराबोर वसंत के आगमन की ढ़ेर सारी शुभकामनाएँ एवं बधाई, वसंत सा सभी सब जीवन में प्रसन्नता ले अगड़ाई।
© सतीश कुमार पाण्डेय
