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Mithilesh Kumar
Mithilesh KumarCourseLiteraturePoetry
3 Feb 2021·1 min read·

वोट जागरण

सुबह थी अनोखी भीड़, साईकिल सवार सभी। हंसो की वेश में, मुख पे रंग बिरंगे पट्टी बांधे। जा रहे झुंड में, कोराना को धता बता। वोट जागरण करने।

जनता जाग जाए, चुने अपने हाथो से। एक कर्णधार, नीति निर्माता अपने लिए। एक वोट आवश्य दे, अपने अधिकार को पहचाने। वारिश की झिरकिया, डिगा नहीं पाई।

समझाते सभी को, ना पड़े किसी बहकावे में। वोट करे, ना पड़े चक्कर में। कभी वोट, कभी नोट, करे छुट्टी। ले विराम, चुने अपने कर्णधार, नीति निर्माता।

सुबह थी अनोखी भीड़, साईकिल सवार सभी। हंसो की वेश में, मुख पे रंग बिरंगे पट्टी बांधे। वोट जागरण करने।

जनता जाग चुकी है, लत लग गई विकास की। वोट आवश्य देंगे, चुनेंगे ऐसी सरकार। घर घर खुशहाली लाए, देश को नई दिशा दे।

विकास का कीर्तिमान, नित बने। जनता जाग चुकी, डिगा नहीं सकती। जात पात की दीवारें, धर्म स्थान की बंदिशे।

वोट अपने सत्य के साथ करे,आत्मा को झलकोरे। बने कर्णधार, नीतिनिर्धारक, पहले खुद के। चले वोट करे।

निकल पड़े है, टोली सफ़ेद वेश में। जनता को बताते, चल पड़े है। वोट जागरण करने।

#वोट #इलेक्शन

©#मिथिलेश कुमार