अपने प्रियजनो को आप क्या दे रहे है?
मानव व्यवहार(Human Behavior) के अध्ययन के दौरान मैंने एक बात को गौर किया है कि वैसे लोग जो घर से बाहर काम करते है वे शाम में जब अपने-अपने घर को लौटा करते है तो उनके पास खाली टिफिन बॉक्स,खाली पानी का बोतल तो होता है लेकिन उनके पास जो दिमाग होता है उसमें वे ठूंस-ठूंस कर गुस्सा भरकर लाते है।
इस गुस्से का पहला शिकार वो होता है जो सबसे पहले उसके सामने आता है।एक प्यारे से मासूम बच्चे ने गोद में उठाने कि जिद की तो उसी पर वह उतर गया,किसी ने हाथ में रिमोट नहीं दिया तो उसी पर।ये लोग ऑफिस में बड़े आराम से पेश आते।बॉस के सामने,अपने स्टाफ के सामने ये इतने मधुर व्यवहार करते कि ऐसा लगता है कि पुरुषोत्तम श्रीराम के बाद यही हैं जो इतने शालिन है।
तो फिर घर आते ही ये पुरुष लोग रौद्र-रूप क्यूँ धारण कर लेते और महिलाएँ कैकेयी रूप में क्यूँ आ जाती?क्या सच में ये इतने परेशान होते है या अपने आप को जगत का पालनहार समझ कर लोगों को दास-दासी और निठल्ले समझकर ऐसा रूप दिखाया करते?इस सवाल के कई उत्तर हो सकते है,उनमें विवाद छिड़ सकता है फलतः मैं उस उत्तरों पर वाद-विवाद करना नहीं चाहता हूँ,क्योंकि वह प्रसंग से हटकर है।
मैं आपको एक घटना सुनाता हूँ।मैंने अपना बचपन गाँव में बिताया है।मेरे गाँव के ठीक बगल में एक बाँस का बगीचा,बाँसबेरी,था जिसमें विभिन्न प्रकार कि चिड़ियाँ ने अपना-अपना घोसला बना रखा था।सूर्यास्त के बाद चिड़ियाँ जब चर-बुल के लौटती थी तो अपने-अपने घोसले को खोजती थी,अपने-अपने बच्चे को खोंजती थी और उन्हें चोंच में लाई हुई दाना खिलाती थी।ठीक इसी प्रकार मेरे पड़ोसी की गैया(गाय) भी जब शाम में चरकर लौटती थी तो अपने खूँटे पर जाने के पहले रंभाते हुए अपने बछड़े को खोजती।
मैंने एक दिन जब मानव व्यवहार और पशु व्यवहार की तुलना कर रहा था तो पाया की आफ्नो को प्यार-दुलार करने में तो जानवर हमसे आगे है।मैं यहाँ बौद्धिकता और आर्थिक ,तकनीकीगत उपलब्धि की तुलना की बात नहीं कर रहा हूँ।अरस्तू ने कहा की-मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है।आपको क्या लगता है हम एक प्राणी है?इस बात पर विचार करने के लिए मैं आपको स्वतंत्र छोड़ रहा हूँ।
मुझे जो बात करनी है वह यह है कि आप जब घर लौटें तो अपने ऑफिस,कार्यस्थल,आदि की परेशानियों को बाहर ही पार्क कर दें जैसा कि आप अपने गाड़ी को पार्किंग में पार्क कर देते है।अपने बदबूदार जूते-चप्पलों को बाहर ही उतर देते है।अपने गुस्से को भी बाहर ही उतर कर आइये।
क्योंकि आप जिस घर में प्रवेश कर रहे है,वहाँ आपको फ्रेश होने का भरपूर साधन मिलेगा।जो लोग आपके घर लौटने का इंतजार कर रहे थे वे आपके एक मुस्कान से चहक उठेंगे।अगर आपके बच्चे है तो आपकी गोद में आकर सुकून पाएंगे।अगर आपकी पति या पत्नी है तो आपके छुअन से रोमांचित हो जाएंगे।आपके माता-पिता,भाई-भौजाई,कोई बुजुर्ग है तो आपके सकुशल लौटने पर मन ही मन खुश होएंगे।
आप रोज उनके लिए गिफ्ट नहीं ला सकते। वे आपसे इसकी उम्मीद भी नहीं करते है।वे सिर्फ इस बात कि उम्मीद करते है कि आपका मिजाज ठीक हो।दुनियाँ आपको जो भी समझे,अच्छे-बुरे,ठग,बेईमान,निकम्मा,एक्सपेर्ट पर अपने प्रियजनों के लिए आप अच्छा से पेश आइये।सारे कड़वाहट को भूलकर अपने घर में प्रवेश करिए।
