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हे प्रिय कहा छी अहां
हे प्रिय कहा छी अहां, विलख रहल छी हम, अहां बिनू जी नय लगैया, अहां से मिलैके दिल करैया,
छोरू-छोरू कैलक बात, अब तअ राखु हमर लाज, करब हम अहांसॅ नैना चार, जखन धरि नय मिलैत अहांक प्यार, छोङब नय हम अहांके हाथ ।
उपरोक्त कविता मेरे द्वारा मैथिली भाषा में रचित है। इस कविता में 'प्रिय' शब्द 'एकाग्रता' को कहा गया है ।
©#नरेन्द्र प्रसाद निराला
