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Satish Kumar Pandey
Satish Kumar PandeyCourseLiteraturePoetry
3 Feb 2021·1 min read·

विचार कर लो

खुद के जीवन में, खुद से खुशियों की तलाश कर लो। भूल कर दूसरों की सौहरत,खुद पर अटूट विश्वास कर लो। भय को करके तिरोहित,निर्भयता अपने पास कर लो। भरके उड़ान ऊँचे, अपने कदमों में सारा जहान कर लो । अपने हौसलों को दे कर पंख,खुद का स्वर्णिम दास्तान कर लो । भरके संवेदना जीवन में, निर्मल अपना ईमान कर लो । बन कर मसीहा मानवता का, लाचारों के स्वर को गुंजयमान कर लो । जो सर्वस्व कुर्बान किये इस धरा पर,आज उनका ध्यान कर लो। त्याग कर अभिमान अपने ज्ञान का, जरा अपने पूर्वजों पर भी गुमान कर लो । गैरों के हाथों की कठपुतली बनना छोड़कर, अपना वक्त स्वयं पर निसार कर लो । संजो कर अद्मय साहस अपना, सफलता की पुकार कर लो। उठो हे!नर ज्ञानी, आज अपना उद्धार कर लो । जो डूबोये तुम्हारे जीवन को वेदना के सागर में, आज उससे युद्ध आर-पार कर लो । अमूल्य है जीवन तुम्हारा, इसका अद्भुत श्रृंगार कर लो। किसी के सहारे का मोहताज न होकर, खुद ही खुद का नाव पार कर लो । खुद के अहंकार को करके धराशायी, इस जहां के हीत में कुछ विचार कर लो । करके त्याग गमों का, अब अपने दर खुशियों की बौछार कर लो । उठती दुर्भावनाओं पर,भीषण प्रहार कर लो । करके मुक्त दुराचारियों से इस धरा को, सन्मार्ग का विस्तार कर लो । होकर दृढ़संकल्पित अब खुद का उद्धार कर लो । अब राष्ट्रीय उत्थान का, अपने अन्तर्जगत में विचार कर लो ।

©#सतीश