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Akarshit Maurya
Akarshit MauryaCourseLiteraturePoetry
3 Feb 2021·1 min read·

वो वृक्ष ही हैं

धरा के दहन को जो अवशोषित करें, वो वृक्ष ही हैं। धाय माँ की तरह जो पोषित करें, वो वृक्ष ही हैं॥

रुख को देख हमारे, प्रकृति कुद्ध है हमसेI सह सब दुःखों को सर्वस्व जो अर्पित करें, वो वृक्ष ही हैं॥

वन रहित मृदा, आज अपरदित हो रही है। साथ-मिलकर जो निक्षेपण करें, वो वृक्ष ही हैं॥

मत कुल्हाड़ी चला इनपर, दर्द इन्हें भी होता है। जिनकी छाँव मे खड़ा होकर प्रहार करे तू जिनपर, वो वृक्ष ही हैं॥

तेरे पत्थरों की चोट से, खून उनका भी बहता है। चोट सहकर भी जो तुझे फल दें, वो वृक्ष ही हैं॥

स्वप्न है जिनका स्वदेश की माटी को, विश्वविश्रुत बनाने का। वनो को जो विश्वंभर बनाये, वो वृक्ष ही हैं॥

आओ संकल्प लें हम सभी, प्रकृति के संरक्षण का। जो आपके परिवार को संरक्षित करें, वो वृक्ष ही हैं॥ Alive words of Akarshit.

©#आकर्षित मौर्य