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Rahul Devashish
Rahul DevashishCourseLiteraturePoetry
3 Feb 2021·3 min read·

ये मोह-मोह के धागे

भूतकाल का शोक,वर्तमान का मोह और भविष्य का भय हर मनुष्य को चिंतित बनाये रखता है। भूतकाल की घटनाओं को हम दुबारा जी नहीं सकते, भविष्य की परिस्थितियों से हम अवगत नहीं है तो हमारे सामने वर्तमान ही है जिसे हम जी सकते है। अगर वर्तमान सही कर लिया जाये तो भूतकाल भी सही हो जायेगा। क्यूंकि आज का वर्तमान ही कल का भूत है। 

जब बात वर्तमान की करें तो वर्तमान में चिंता का कारण मोह है। तो सवाल ये है की मोह किससे है ? इसके विश्लेषण करने पर हम पाते है कि हमारा मोह मुख्यतः छह चीजों से है। ये हैं -शक्ति,यश,धन,ज्ञान,सौंदर्य तथा त्याग। 

<h3<a href="https://hindimedium.com/author/rahuldevashish/ye-moh-moh-ke-dhage-28#%E0%A4%B6%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A4%BF-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%AE%E0%A5%8B%E0%A4%B9" id="शक्ति-का-मोह"शक्ति का मोह</a</h3

शक्ति के मोह के कारण हम भोजन करते है। शाक- सब्जी , दूध , अंडे , जूस , फल , इत्यादि का सेवन हम शक्ति प्राप्त करने के लिए करते है। हालाँकि&nbsp;&nbsp;भोजन करने का एकउद्देश्य&nbsp;स्वाद प्राप्ति भी है लेकिन प्रार्थमिक उद्देश्य&nbsp; शक्ति-संवर्धन ही है। हमें&nbsp; शक्ति से मोह होता है और इस मोह के कारन हमें लगता है कि हम खाएंगे नहीं तो बीमार पड़ जायेंगे।

<h3<a href="https://hindimedium.com/author/rahuldevashish/ye-moh-moh-ke-dhage-28#%E0%A4%AF%E0%A4%B6-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%AE%E0%A5%8B%E0%A4%B9" id="यश-का-मोह"यश का मोह</a</h3

अपना नाम कमाने के लिए ; परिवार, संप्रदाय, समाज, आदि में&nbsp; सम्मान पाने के लिए हम मोहित होते है । यश का यह मोह हमें नेक काम करने को प्रेरित करता है । हम कर्म करते है और बदले में फल की इच्छा करते है। अपने नाम का बैनर छपवाते है, सोशल मिडिया पर पोस्ट करते है, टेलीविजन , रेडियो , इंटरनेट आदि पर प्रचार करवाते है । यश पाने के लिए एक सामान्य व्यक्ति से लेकर ऊँचे पदों पर विराजमान अधिकारी, कर्मचारी भी लालायित रहते है ।&nbsp;

<h3<a href="https://hindimedium.com/author/rahuldevashish/ye-moh-moh-ke-dhage-28#%E0%A4%A7%E0%A4%A8-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%AE%E0%A5%8B%E0%A4%B9" id="धन-का-मोह"धन का मोह&nbsp;</a</h3

एक- एक पैसा जोड़कर, ढगी करके&nbsp; , बेईमानी करके&nbsp; , इज्जत बेचकर , भूखे- प्यासे रहकर , दिन की चैन और रात की नींद हराम करके हम धन इकठ्ठा करते है। यह धन हमें सुख- सुविधाओं से सुसज्जित होने का अवसर देता है। धन हमारी जीवन शैली को गुणवत्ता पूर्ण&nbsp; बनाता है।&nbsp;भोजन, वस्त्र,&nbsp; आवास, यातायात , आदि की व्यवस्था धन से ही हो पाई है। इसलिए&nbsp; हम धन का साथ&nbsp;छोड़ना कभी पसंद नहीं करते हैं&nbsp; । और फल स्वरुप यह धन भी हमें आजीवन जकड़े रहता है।

<h3<a href="https://hindimedium.com/author/rahuldevashish/ye-moh-moh-ke-dhage-28#%E0%A4%9C%E0%A5%8D%E0%A4%9E%E0%A4%BE%E0%A4%A8-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%AE%E0%A5%8B%E0%A4%B9" id="ज्ञान-का-मोह"ज्ञान का मोह&nbsp;</a</h3

बचपन से हम पढ़ना -लिखना&nbsp; शुरू करते है । परिवार&nbsp; की पाठशाला से हमारी पढाई शुरू होती है । फिर&nbsp; प्रार्थमिक विद्यालय ,&nbsp; मध्य विद्यालय , उच्च विद्यालय , महाविद्यालय&nbsp;, विश्वविद्यालय तक हम पढ़ते किसी पेशे को शुरू करते है तो उसके लिए भी हमें प्राफेशनल पढाई पढ़नी&nbsp; पड़ती&nbsp;है। इसके अलावे इंटरनेट पर कुछ कुछ&nbsp;&nbsp;देखते रहना , सुनते रहना भी ज्ञान अर्जन का ही रूप है। बिजनस या नौकरी में&nbsp; अनुभव प्राप्त करना भी ज्ञान अर्जन है।&nbsp;

<h3<a href="https://hindimedium.com/author/rahuldevashish/ye-moh-moh-ke-dhage-28#%E0%A4%B8%E0%A5%8C%E0%A4%82%E0%A4%A6%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%AF-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%AE%E0%A5%8B%E0%A4%B9" id="सौंदर्य-का-मोह"सौंदर्य का मोह&nbsp;</a</h3

स्नान, वस्त्र धारण, कॉस्मेटिक उपयोग , हेयर स्टाइल, नेल स्टाइल, इत्यादि सौंदर्य सिद्धि के साधन है।&nbsp;एक &nbsp; बूढ़ा व्यक्ति भी&nbsp; सेविंग करता है और एक बूढी औरत भी केश सवारती है । यह दोनों ही सौंदर्य का प्रदर्शन है। शृंगार रस मृत्यु तक हमारा साथ नहीं छोड़ता।&nbsp;

<h3<a href="https://hindimedium.com/author/rahuldevashish/ye-moh-moh-ke-dhage-28#%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%97-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%AE%E0%A5%8B%E0%A4%B9" id="त्याग-का-मोह"त्याग का मोह&nbsp;</a</h3

हम त्याग करना नहीं चाहते । अपने खून पसीने से जो अर्जित किया है उसे अपने अधिकार क्षेत्र से दूर जाने देना नहीं चाहते । पूरी जवानी हम धन , जन , बल कमाते है। इन्हे संचित करते है। इस&nbsp; लोभ में की जब अवस्था गिरेगी तो इससे अपना निर्वाह करेंगे।&nbsp; लेकिन त्याग नहीं करने की भावना से हम इतने घिर चुके होते है कि इन चीजों से आसक्त हो जाते है। जब हम बूढ़े हो जाते है तो भी त्याग की भावना नहीं आ पाती है। दरवाजे पर बैठकर अपने सम्पति की रखवाली करते है।&nbsp;

<h3<a href="https://hindimedium.com/author/rahuldevashish/ye-moh-moh-ke-dhage-28#%E0%A4%A8%E0%A4%BF%E0%A4%B7%E0%A5%8D%E0%A4%95%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%B7" id="निष्कर्ष"निष्कर्ष&nbsp;</a</h3

हम सभी अपने जीवन में जो भी कर रहे है हमें&nbsp;उसका आंकलन करना चाहिए। समय- समय पर अपने मेमोरी को साफ करना चाहिए । अपने समय और परिस्थिति के अनुसार हमें प्रतिदिन, या सप्ताह में एक दिन , या&nbsp; माह में एक दिन,&nbsp; या&nbsp;कम-से-कम वर्ष में&nbsp; एक दिन&nbsp; का कुछ समय एकांत में बिताना चाहिए । ऐसे जगह पर जहाँ हम स्वयं से बात कर पाएं । हमें&nbsp; व्यक्ति , वस्तु , स्थान, आदि से स्नेह रखने की आदत डालनी चाहिए&nbsp; उससे मोहित होने की नहीं। क्योंकि ये मोह-मोह के धागे एक चैन की तरह है। ये चैन हमें बेचैन कर देता है । और&nbsp;&nbsp;बेचैन होकर&nbsp;हम दम तोड़ देते है।&nbsp;