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Akarshit Maurya
Akarshit MauryaCourseLiteraturePoetry
3 Feb 2021·1 min read·

आओ योग दिवस मनायें

चिन्तन चरित्र व्यवहार में बहुधा उतारें योग। योगाभ्यास कर शरीर व मन से भगायें कुरोग॥ योग को जीवन में अपना व्यक्तित्व को ऊँचा बनायें। आओ हम सब मिलकर यह योग दिवस मनायें॥

योग अर्थात् अच्छे विचारों से स्व को जोड़ना। चञ्चलचित्त का निरोध कर सांसारिकता से मुँह मोड़ना॥ बस इस अगाध सी बात को लोगो तक पहुंचायें। आओ हम सब मिलकर यह योग दिवस मनायें॥

संस्कृत पढ मिलकर विश्वविश्रुत बनाये अपनी संस्कृति। खुद को संयुक्त कर ध्यान से मिटायें मानसिक विकृति॥ योग को चहुँओर फैला इसे सार्वभौमिक बनायें। आओ हम सब मिलकर यह योग दिवस मनायें॥

रोगो के अवसान हेतु अपनाये आयुर्वेद के सिद्धान्त । व्याधियों की इतिश्री कर बनाये भारत को विक्रान्त॥ यम-नियम को अपना सर्वथा हम शिष्ट कहलायें। आओ हम सब मिलकर यह योग दिवस मनायें॥

इसमेंं न ही कोई खर्चा न ही कोई दिखावा है। शारीरिक,मानसिक व सामाजिक स्वास्थ्य का बढावा है॥ घर में ही रहकर बस चटाई बिछाकर बैठ जायें। आओ हम सब मिलकर यह योग दिवस मनायें॥ Alive words of Akarshit.

©#आकर्षित मौर्य