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Kumar Bhupesh
Kumar BhupeshCourseLiteraturePoetry
3 Feb 2021·1 min read·

आइए

और, कितना विकास चाहिए     जरा खुलकर बताइए...               आइए...

इक्यावन करोड़ खाते में     तिरपन करोड़ पाइए...               आइए...

और, कितना चाहिए     जरा, ये तो बताइए...               आइए...

बेफिजूल बात ना बनाइए     सिर्फ़ हाँ में हाँ मिलाइए...               आइए...

खुद को जरा आप ही समझाइए     यूँ नदी को उल्टी ना बहाइए...               आइए...

पैदल चले तो क्या हुआ     पांव की बिवाई भूल जाइए...               आइए... दौर-ए-चुनाव हैं अभी     हिंदु-मुस्लिम में बंट जाइए...               आइए...

©#कुमार