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Aman Kumar Vikki
Aman Kumar VikkiCourseLiteraturePoetry
23 Jul 2021·1 min read·

आओ आषाढ़

तपती जेठ की मार से झल्ला उठा संसार गरज उठे है जन-मानष अब लौट आओ आषाढ़। ले आओ काली मेघा लगाओ बारिश की फुहार।

भरी गर्मी में फटती जमीं को अमृत सा जलपान कराकर उमस भरी मौसम में राहत की आसार जगाओ।

जलती जमीं की प्यास बुझाकर करवट बदलती नदियों की धार बढ़ाओ।

हरी चुंदरीयाँ ओढाकर मैदानों को हरयाली की पाठ पढ़ाओ।

©अमन कुमार (विक्की)