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Rahul Devashish
Rahul DevashishCourseLiteraturePoetry
22 May 2021·1 min read·

अच्छा लगता है

कुतर-कुतरकर नाखून को दाँतों से..फेंकना.. अच्छा लगता है।

टक-टकी लगाकर कहीं.. अपलक ताकना.. अच्छा लगता है।

मसलकर पत्तियों को.. चुटकियों से..रगड़ना.. अच्छा लगता है।

छानकर धूल से..कंकरों को पानी में..छींटना.. अच्छा लगता है।

© राहुल देवाशीष