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Rahul Devashish
Rahul DevashishCourseLiteraturePoetry
3 Feb 2021·1 min read·

'अच्युत' शब्द की व्याख्या

अच्युत का मतलब होता है-जिनका मूल्य कभी कम नहीं होता। अच्युत भगवान श्रीकृष्ण का एक नाम है। जिसका वर्णन विभिन्न शास्त्रों में हुआ है। श्रीमद भगवदगीता के प्रथम अध्याय के इक्कीसवें श्लोक तथा अठारहवें अध्याय के तेहत्तरवें श्लोक में अर्जुन ने भगवान श्रीकृष्ण को अच्युत नाम से पुकारा है। श्लोक इस प्रकार है -

सेन्योः उभयोः मध्ये रथम् स्थाप्य मे अच्युत | यावत् एतान् निरीक्षे अहम् योद्धु-कामान् अवस्थितान् || 1.21 || <!--more-- अर्थ- हे अच्युत (कृष्ण) ! आप दोनों सेनाओं के मध्य मेरे रथ को ले चलें। जहाँ से मैं युद्ध की ईच्छा से आये सेनाओं को देख सकूँ।

नष्टः मोहः स्मृतिः लब्धा त्वत्प्रसादात् मया अच्युत स्थितः अस्मि गतसन्देहः करिष्ये वचनं तव || 18 .73 ||

अर्थ- हे अच्युत ! मेरा मोह अब दूर हो गया है। मेरी स्मृति वापस आ गयी है। अब मेरा संदेह दूर हो गया है। अब मैं आपके कहे अनुसार कार्य करने को तैयार हूँ।

भगवान और इंसान में एक बड़ा अंतर यह है कि भगवान समय, स्थान और परिस्थिति से प्रभावित नहीं होते है। वे लीलाएँ (रोल प्ले ) करते है। जैसे नाटक और सिनेमा में एक धनी आदमी भिखारी का रोल करता है लेकिन वह सच में भिखारी होता नहीं है। वे सिर्फ दिखावा कर रहे होते है। इससे उन्हें और दर्शक दोनों को आनंद मिलता है। ठीक इसी प्रकार भगवान भी लीलाएँ करते है।

भगवदगीता कहने के लिये वे अर्जुन के सारथि का रोल स्वीकार करते है। लेकिन यहाँ भी वे अपना विश्व रूप दिखाते है , गीता ज्ञान देते है। यानि भगवान रोल तो सारथि का कर रहे है लेकिन काम परमेश्वर और विद्वानों वाला कर रहे है।

सारथि के रूप में भी भगवान अपना मूल्य नहीं खोये है। यही अच्युत है -कहीं भी अपनी महिमा नहीं खोने वाला शक्श।

श्रीमद भगवद्गीता में भगवान कृष्ण को अर्जुन ने 40 नाम से पुकारा है। इसी में से एक नाम अच्युत है। भगवान के अन्य नामों की चर्चा हम अगले लेख में करेंगे।

हरे कृष्णा !

-राहुल देवाशीष