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Rahul Devashish
Rahul DevashishCourseLiteraturePoetry
31 May 2021·1 min read·

अहसास

सर्द हवाओं से छूकर, रूह जब सिहरती है..

उमड़ती घटाओं को देखकर, आँखें जब बंद होती है..

नदी की कल-कल से, मन जब विकल होता है..

भीगी माटी को कुरेदकर उँगलियाँ, न जाने क्या महसूस करती हैं।

© राहुल देवाशीष