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Amresh Giri
Amresh GiriCourseLiteraturePoetry
3 Feb 2021·1 min read·

अकेलापन

अकेलापन अच्छा भी होता है बुरा भी होता है, यह हमारे सोच पर निर्भर होता है।

अकेले में ही हम खुद को जान पाते हैं, भीड़ मे तो यूँ ही तन्हा रह जाते हैं।

खुद से बाते भी हो जाती है, किसी को खबर तक नही हो पाती है।

किसी को चैन मिलता है अकेलेपन से, तो कोई बैचेन हो जाता है खुद से।

खुद से बाते करने का एक सुनहरा अवसर होता है, दूसरी को छोड़ खुद की बातो को सुनने का मौका होता है।

कोई इस पल को यूँ ही गंवा देता है, तो कोई इसी पल मे खुद को संवार लेता है।

हाँ,अकेलापन अच्छा भी होता है बुरा भी होता है, कोई चैन से सोता है तो कोई बैचेन होकर रातें गुजार देता है।

किसी को हताशा तो किसी को निराशा हाथ लगती है, पर अकेले मे कोई पूरा हो तो ही तो सपनें समझ आते हैं।

गम कितना भी बडा क्यों न हो , वो उस गम मे भी खुश रहना सीख लेता है।

अकेलेपन से जिसने जूझ लिया, कोई और उसे कहाँ रूला पाता है।

समस्यायें तो उनको भी होते हैं, पर हौसलों से हर मुकाम पा लेते हैं।

जो अकेले रहना सीख लेते हैं, वो खुद से बाते करने का तरीका भी खोज लेते हैं। ©#अमरेश गिरि