अपने हिस्से भारत महान है
अपने हिस्से उमंग है, तरंग है । अपने हिस्से वेदांत है, सिद्धांत है । अपने हिस्से मर्यादा पुरुषोत्तम का त्याग है, वैराग है । अपने हिस्से गीत है, संगीत है । अपने हिस्से जीत है, प्रीत है । अपने हिस्से सदाचार है, संस्कार है । अपने हिस्से रीषियों का अनुसंधान है, गीता का अमिट ज्ञान है। अपने हिस्से संघर्ष है, उत्कर्ष है । अपने हिस्से संयम है, समर्पण है । अपने हिस्से परिवार है ,प्यार है । अपने हिस्से ज्ञान है, विज्ञान है । अपने हिस्से वरदान है, बलिदान है । अपने हिस्से माताओं की कुर्बानी है, पिता की अनकही कहानी है । अपने हिस्से वीणापाणी है, शत्रुमर्दनी शारदे भवानी है । अपने हिस्से दधीचि का दान है, कर्ण सा महान हैं । अपने हिस्से मलयागिरी का सुगंधित ब्यार है, मातृभूमि का अनुपम श्रृंगार है । अपने हिस्से इस जहां में प्रथम ज्ञान का विस्तार है,प्रचार है । अपने हिस्से भीष्म की अडिग प्रतिज्ञा है, शत्रुओं की अवज्ञा है । अपने हिस्से गंगा की पानी है, गुरुओं की मधुर वाणी है । अपने हिस्से भगत सिंह की जवानी है, लक्ष्मीबाई रानी है । अपने हिस्से बुजुर्गों का मान है, सम्मान है । अपने हिस्से झिगुरों की तान है, कोयल की गान है । अपने हिस्से लहलहाते खेत है, खलिहान है । अपने हिस्से जी तोड़ परिश्रम करते मजदूर है,किसान है । अपने हिस्से सर पे कफन बाँधे निर्भिक, निडर, शौर्य से सराबोर राष्ट्र के जवान है, पहचान है । अपने हिस्से कौटिल्य सा महान हैं, जग में आलोकित आर्यावर्त महान हैं । अपने हिस्से विश्ववंद्यो का साम्राज्य है, सभी को जिस पर नाज है। अपने हिस्से मंगल फतह का स्वाभिमान है, अन्तरिक्ष की उड़ान है । अपने हिस्से जगत् में अद्भुत, अद्वितीय, आलोकित, अनुपम, सूर्य - चन्द्र सा उद्यमान होने का ताज है । इसिलिए हमें वीरों की धरा, भारत बसुंधरा पर गर्व और नाज है। जिनके पाँवो में नतमस्तक विश्व साम्राज्य है । इस राष्ट्र की मर्यादा रहे सलामत तभी महफूज अपनी जान है ।
©सतीश कुमार पांडेय
