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अश्रुपूरित कर गए
जब भरा तूने रवानी इक कहानी हो गए चार दिन की जिन्दगी तुम जिन्दगानी हो गए ।
दोस्तों के मस्तमौला अपनों के तुम थे अजीज उतरे जब तुम रणभूमि में दुश्मनों की निशानी हो गए।
जीना तो सबको यहाँ बस गिनती के ही चार दिन जीते जी और जाकर भी तुम चार चाँद कर गए ।
बाँकपन था तुम्हारा रणबाँकुरा जब से हुए माँ भारती को सदा कर परिपाटी चेतना तुम भर गए।
हो ना पाऊंगा उऋण तुम ऋण ही इतना कर गए ओढ़ा जब तूने तिरंगा अश्रव्य व अश्रुपूर्ण कर गए । ©# कुमार
