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Kumar Bhupesh
Kumar BhupeshCourseLiteraturePoetry
3 Feb 2021·1 min read·

आत्मनिर्भर_मौत

आत्मनिर्भरता के बखान में घनेसर और बटेसर के मचान में, लगी आज बड़ी अंधी होड़ हैं मत पूछना ये कैसी शोर हैं ?

दोनों तरफ से खूब सर्कस हुआ फजीहत से खाली तर्कश हुआ, उलझते सुलझते ही दोनों चले गए गालियां गिनते-गिनते दिन ढल गए !

अगली सुबह फिर वही कीच-कीच संग कहानी में कई और पेंच फंस चुके थे, सुनने को न कोई अब भी तैयार था आज तो कल से और तेज धार था !

पता था सबको कि दोनों बेबजह ही लड़ रहे थे पर, चुनावी समर में नेताओं को नहीं खल रहे थे, जुनून जैसे दोनों में कोई स्वाभिमानी चाभी भर रहे थे और, देखते-देखते बेमौसम ही मौत छल रहे थे !