औरत
औरत एक आश होती है, छिपाए रहती कितने राज। लड़की से औरत की सफर, बहुत ही टेढ़े मेढ़े। इसे समझना आसान नहीं, कितने राज दफन है उसके सिने मे।
आदमी औरत का रिस्ता ऐसा, समाज के कुछ मापदंड ऐसे है। लड़की झेलती है, औरत के सफर मे, आते है कैसे कैसे पड़ाव। औरत सबमे है, औरत के बिना तो किसी आदमी की पहचान संभव नहीं।
मै आदमी भी हु, औरत भी हु,। औरत कोई जेंडर नहीं एक धौर्य, श्रद्धा एवं प्यार की प्रतिमूर्ति है। औरत इस देश एवं काल की जननी भी है।
इसके कई रूप है, विभिन्न कालो मे। कभी बच्ची, कभी लड़की, कभी बहू, कभी माँ, और बहुत सारे रूप है। औरत गंभीर होती है, औरत सब कुछ है।
औरत हर घर की गरुर होती है। इनके दायरा महान है। ये सम्मान है, अभिमान भी, स्वाभिमान भी। आज गिरती मानसिकता एवं नैतिकता की दौर मे।
हमे अंदर की औरत को जगाने की आवश्यकता है। और उन्हे मजबूत एवं शसक्त बनने की आवश्यकता है। औरत किसी की मुहताज नहीं, यह शक्ति के रूप है।
औरत एक आश है, छिपाए हुए है कितने अर्श। औरत मे भी आदमी है, छिपाए है कितने राज इनमे। औरत हु, इस देश का भविष्य एवं वर्तमान भी।
औरत तो पूरे भारत एवं विश्व की जननी है। ये पूज्य है, धरण करने योग्य है। #औरत
©#मिथिलेश कुमार
