← PrevNext →
बाल विवाह
फुदकने की उम्र में बचपन की उनकी ख्वाइशों को कुचलकर कैद कर देना।
खेलने की उम्र में खिलौने की जगह हाथों में चूड़ियाँ डाल देना।
दिशा बोध और मंगल-बुद्ध रटने की उम्र में मंगल-सूत्र के, बेड़ियों में जकड़कर फेरे का लगवा देना।
स्लेट घिसने की उम्र में उनकी माँगे भरकर पन्नों की जगह साड़ीयों पर हाथ फेरने सिखाना।
और समाज द्वारा हर्षित होकर शुभ विवाह का आशिर्वाद देना बाल विवाह को बढ़ावा देता है।
'©अमन कुमार (विक्की)
