बहुत याद आते हैं
टूटे हुए सपने और रूठे हुए अपने बहुत याद आते हैं । आजकल रिश्ते दौलत के ढेर पर बनाये जाते हैं । त्याग के अनमोल तौफे का अब बजारू भाव लगाये जाते हैं । जिसने अपने रक्त से सिंचा हो जीवन को, उसी पर प्रश्न चिन्ह लगाये जाते हैं । किसी के बेबसी को हँसी के साजोसमान बनाये जाते हैं । किसी के आँसू पोछने के बजाय, हँसी के ठहाके लगाये जाते हैं । किसी के खुद्दारी को कायरता के लिबास पहनाये जाते हैं । जो है दीन उसे ऊँचे दहलीज से लात मार भगाये जाते हैं । अपनों से मुँह मोड़ के, गैरों से हाथ मिलाये जाते हैं । यही जिन्दगी है मेरे दोस्त जहाँ यादों के महल बना,खुद खाक में मिल जाते हैं । फिर न जाने क्यों, जनवेदना अपने आँखों से हम ओझल कर जाते हैं ? आओ अब जीवन जीने की नई कला अपनाते हैं । अपनों के अपने बन एक दुजे के साथ निभाते हैं । टूटे हुए सपनों को फिर से नए कलेवर में उत्कृष्ट बना सजाते हैं। रूठे हुए अपनों को मना, अब स्वर्ग छठा इस धरा पर लाते हैं । चलो होकर संकल्पित अब सभी का साथ निभाते हैं । हर मायूस चेहरों की हमसब ही मुस्कुराने के आधार बन जाते हैं । मानव बन मानवता की दुनिया सजाते हैं ।
©सतीश कुमार पांडेय
