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भक्त और चमचे
भक्त और चमचे कैसे लगे हैं आपसी लड़ाई में! और, नेताजी जीतकर मौज की अँगड़ाई में !!
अभी तो लगेंगे जाकर जुगत कमाई में ! नेताजी मिलेंगे फिर अगली पुरवाई में !!
फिर दाना डालेंगे वोट की सेकाई में ! फंसायेंगे आकर फिर वो अपनी चतुराई में !!
अंदर से एक दोनों नाम दूजा चारपाई में ! आ भी तो जाते फिर हम उनकी घुड़काई में !!
कुछ भी मिलेगा नहीं इस रूखी रुसवाई में ! फिर क्यूँ दे रहे हो सिर खुद गरम कढ़ाई में !!
©# कुमार
