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Kumar Bhupesh
Kumar BhupeshCourseLiteraturePoetry
3 Feb 2021·1 min read·

भक्त और चमचे

भक्त और चमचे कैसे लगे हैं आपसी लड़ाई में! और, नेताजी जीतकर मौज की अँगड़ाई में !!

अभी तो लगेंगे जाकर जुगत कमाई में ! नेताजी मिलेंगे फिर अगली पुरवाई में !!

फिर दाना डालेंगे वोट की सेकाई में ! फंसायेंगे आकर फिर वो अपनी चतुराई में !!

अंदर से एक दोनों नाम दूजा चारपाई में ! आ भी तो जाते फिर हम उनकी घुड़काई में !!

कुछ भी मिलेगा नहीं इस रूखी रुसवाई में ! फिर क्यूँ दे रहे हो सिर खुद गरम कढ़ाई में !!

©# कुमार