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Aman Kumar Vikki
Aman Kumar VikkiCourseLiteraturePoetry
4 Aug 2023·1 min read·

भूल जाता हूं

कभी बाजू में रखा सामान तो कभी मेज पर रखी चाभी भूल जाता हूं।

बेफीजुल में कभी अलमारी तो कभी संदूक खंगाल देता हूं।

अब वो बाते कहां जब मां को उनकी रखी चीजों को याद दिलाता था।

अब अपने ही हाथों से रखा समान भूल जाता हूं।

अब तो बस विचारों में खोया रहता हूं।

©अमन कुमार (विक्की)