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Kumar Bhupesh
Kumar BhupeshCourseLiteraturePoetry
3 Feb 2021·1 min read·

चुनावी चक्कलस

दालें महंगी, राशन महंगा महंगा होता नित आलू-प्याज हैं ! पार्टियां तो सब हैं चुनाव में पर गायब महंगाई का सवाल हैं ?

बाजार लगा हैं अभी रोजगार का 10 से 19 लाख तक लगा बोल हैं ! सवा लाख करोड़ पर चकित जन मिलेगा या पहले जैसा फटा ढोल हैं ? <!--more-- क्या हुआ इस पर कोई बात नहीं क्या करेंगे बस इसी का सिर्फ शोर हैं ! हम वोटर नहीं जैसे टेस्टिंग लैब हुए वैक्सीन से पहले फ्री ट्रायल पर जोर हैं ?

इसबार कौन किस पर भारी हैं ये बहस दिल्ली से पटना तक जारी हैं ! आमजनों से जुड़े सारे मुद्दे नदारद मंदिर और 370 संग देशप्रेम भारी हैं ?

©#कुमार