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Aman Kumar Vikki
Aman Kumar VikkiCourseLiteraturePoetry
12 May 2021·1 min read·

कोरोना संकट

संकट की इस घड़ी में, चलो एक और संकट मोल लेता हूँ महामारी की इस तूफान को, तारों की तरफ मोड़ देता हूँ ।

ठहाके लगा रहे चाँद को , कटोरे में कैद कर देता हूँ मौत के उमड़ते सागर को , अपनी तलहत्थी से रोक देता हूँ

बहुत मिला है इसके जैसा प्लेग-चेचक और कैसा-कैसा मिला है जैसे को तैसा चलो उसी कतार में इसे खड़ा कर देता हूँ ।

© अमन कुमार (विक्की)