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Rahul Devashish
Rahul DevashishCourseLiteraturePoetry
3 Feb 2021·3 min read·

दुनियाँ उतनी बुरी नहीं: धर्म के पीछे का राज : EP3

'धर्म के पीछे के राज' के पिछले अंक(EP2) में हमने जाना कि 'ये सृष्टि धर्म के स्तम्भ पर चल रही है'। हमने सूर्य , चाँद , स्थूल शरीर , आदि के धर्म के बारे में जाना था।<!--more-- इस अंक में हम धर्म के स्वरुप की बात कर रहे है। धर्म के स्वरुप को जानने के पहले हम यह विश्वास करें कि ये सृष्टि अपने आप नहीं बनी है। इसे किसी ने बनाया है।

जो लोग आस्तिक विचारधारा के है वे मानते है कि ब्रह्मा जी ने इस सृष्टि की रचना की है। जो लोग नास्तिक है उनका मानना है कि प्राकृतिक घटनाओं, दुर्घटनाओं से सृष्टि बनी है। बिग-बैंग थ्योरी, गैसीय गोला, प्लाज्मा, लिक्विड , सॉलिड जैसी भौतिक , रासायनिक रूपांतरण, जीवन का विकासवाद सिद्धांत आदि नास्तिक लोगों के उपकरण है जिनसे वे सृष्टि का उद्गम मानते है। हम दोनों विचारधाराओं का सम्मान करते है।

अपने इस लेख में हम आस्तिक विचारधारा को आधार बनाकर धर्म के स्वरुप को समझने का प्रयास करेंगे। जब सृष्टि की रचना हुई तो रचनाकार ने हर वस्तु में गुण और अवगुण डाले। कौन सा गुण कब नजर आएगा इसके भी नियम बनाकर उसके साथ डाला गया। जो लोग कंप्यूटर विज्ञान के जानकार है वे इस चीज को इस प्रकार समझ सकते है-

जब कोई हार्डवेयर बनाया जाता है तो उसमें एक फर्मवेयर(चिप) डाला जाता है। इस फर्मवेयर में एक सॉफ्टवेयर डाला जाता है। सॉफ्टवेयर निर्देशों का एक समुच्चय है। यह सॉफ्टवेयर उस हार्डवेयर तथा कंप्यूटर के बीच तालमेल बिठाने का काम करता है। जिससे वे एक-दूसरे को समझ पाये। यह शर्तों पर आधारित होता है। यानि एक चीज सही हुआ तो क्या होना चाहिए, नहीं तो क्या होना चाहिए। इसमें if-else कंडीशन का उपयोग होता है।

सृष्टि की हरेक वस्तु इसी पैटर्न पर कार्य करती है। एक साँप को हम छेड़ेंगे तो वह क्या काटेगा , कुछ नहीं करेंगे तो अपने रास्ते चला जायेगा। मधुमक्खी के छत्ते में पत्थर मारेंगे तो हमपर आक्रमण करेगा, उसे कुछ नहीं करेंगे तो वह अपने छत्ते में पड़ा रहेगा। बिजली के नंगे तार छुएंगे , मजे करेंगे तो झटका लगेगा, उसे सावधानी पूर्वक निर्देशानुसार उपयोग करेंगे तो बल्व, पंखे, फ्रिज सब चलेगा।

साँप, मधुमक्खी, बिजली ये सृष्टि की विभिन्न वस्तुएँ है। इसमें जो गुण-अवगुण है यह उसका धर्म है। अगर ये अपने धर्म का पालन करते है तो उसकी पहचान कायम रहती है। अन्यथा वे अपनी पहचान खो देते है। अपने स्वरुप को बनाये रखना हर वस्तु का धर्म है। अपने द्वारा दी जाने वाली सेवाओं को बरक़रार रखना धर्म है।

एक नारी के कई धर्म है , जिनमें एक है वे बच्चे पैदा करे। अगर वे अपने धर्म का पालन न करे तो फिर सृष्टि खतरे में पड़ जाएगी। कुछ लोग वकालत कर सकते है कि टेस्ट ट्यूब बेबी से बच्चे आ जायेंगे। लेकिन यह अप्राकृतिक है। फर्टिलिटी तकनीक से हम कुछ बच्चे ले आ सकते है। लेकिन हरेक घर में बच्चे नहीं दे सकते। इनकी गुणवत्ता, इनकी रोग-प्रतिरोधक क्षमता, इत्यादि उन बच्चोँ से बहुत ही भिन्न होंगे जो प्राकृतिक विधि से जनित बच्चे के होते है। इनकी कीमत,डिलीवरी इत्यादि की कल्पना कोई भी कर सकता है। निचोड़ यह है कि हम कृत्रिम दुनियाँ बनाने के बारे में सोच नहीं सकते।

प्रकृति की हरेक वस्तुएँ जिनसे हम रोज-रोज ताल्लुक रखते है। उनके लिये हम सृष्टिकर्ता का धन्यवाद करें। सृष्टिकर्ता ने हर वस्तुओं को इस सृष्टि में किसी न किसी उद्देश्य के लिये लाया है। फलतः हर चीज का हम सम्मान करें। हर व्यक्ति, वस्तु एवं स्थान का जो गुण-अवगुण है वही उसका धार्मिक स्वरुप है। हर व्यक्ति, वस्तु और स्थान अपने-धर्म का पालन कर रहा है। ये धर्म प्रकति के तीन गुणों -तमो गुण , रजो गुण एवं सतो गुण से प्रेरित होते है। जिनकी चर्चा हम अगले अंक में करेंगे। ये था 'धर्म के पीछे का तीसरा राज'। जानते रहिये-'धर्म के पीछे का राज'।

©#राहुल देवाशीष