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Aman Kumar Vikki
Aman Kumar VikkiCourseLiteraturePoetry
3 Jan 2023·1 min read·

एकजुटता

नए भारत के नव युवक अब हो जाओ तैयार।

छुडाओ पुरखों का कंधा लगाओ तरक्की की कतार।

धूमिल होती सोने की चिड़ियां को नई पंख देकर गगन चुम्बने के होड़ में लाओ।

मालिन होती गंगा के अंचल को धुलकर कंचन सी धार बहाओ।

झूकते हिमालय की थाम कर बाहें नया सम्मान दिलाओ।

टूट रहे है जिनके सपने उन महापुरूषों को मान दिलाओ।

पाव पसार रहे छलिया के भ्रम को तोड़कर उसे उसकी औकात दिखाओ।

आओ सब साथ मिलकर एक हो जाओ।

©अमन कुमार (विक्की)