जल, जंगल और जमीन से जोड़ती साउथ की बहुप्रतीक्षित फिल्म RRR
2015 में रिलीज हुई फिल्म बाहुबली की सफलता ने साउथ की फिल्मों को पैन इंडियन स्तर पर रिलीज करने और उसे हिंदी दर्शकों के मुताबिक बनाने का आइडिया पॉपुलर कर दिया। इससे पहले तक साउथ की फ़िल्में मूल भाषा में रिलीज होने के बाद हिंदी में डब होकर आती रही थी। पिछले कुछ सालों में बॉक्स ऑफिस पर धमाल करने वाली साउथ की फिल्मों की बात करें तो उनमें एसएस राजामौली की फिल्म 'बाहुबली द बिग्निंग' और 'बाहुबली 2 द कॉन्क्लूजन' शामिल है। इनके अलावा केजीएफ चैप्टर 1 और पुष्पा ने भी हिंदी दर्शकों को अपनी ओर आकृष्ट किया है। हालिया रिलीज फिल्म "आरआरआर" के अलावा इस साल केजीएफ 2 पैन इंडिया लेवल पर रिलीज होने वाली है। इन सबसे एक बात तो तय है कि जिस तरह से दर्शकों की दिलचस्पी साउथ की फिल्मों को लेकर बढ़ी है वो बताता है कि आने वाले समय में ये आंकड़ें बढ़ेंगे और इसके व्यापक प्रभाव से बॉलीवुड भी अछूता नहीं रह पाएगा।
एसएस राजामौली उन निर्देशकों में से एक हैं जो अपनी कल्पनाओं से कहानी को भव्यता प्रदान करते है और कहीं न कहीं यही साउथ की फिल्मों की एक खासियत भी है। आंकड़ें बताते है की साउथ की फिल्मों को दर्शक उनकी कहानी से ज्यादा उसकी प्रस्तुति, विजुअल इफेक्ट और एक्शन के लिए देखना पसंद करते हैं। दूसरी तरफ अगर इन फिल्मों की कहानियों की बात करें तो ये कहानियां देशी मगर इमोशनल होने के साथ-साथ दर्शकों को बांधे रखने का माद्दा भी रखती हैं।
टाइटल:- एसएस राजामौली और के. विजयेन्द्र प्रसाद की सुपरहिट जोड़ी द्वारा लिखित और निर्देशित फिल्म आरआरआर (राइज़ रोर रिवोल्ट) किसी ब्लॉकबस्टर फिल्म से कम नहीं है। जिसका इंतजार दर्शक को लंबे समय से था। उम्मीद के मुताबिक फिल्म अपने कंटेंट के प्रजेंटेशन और विजुअल इफेक्ट्स की वजह से टाइटल को ग्लोरिफाई और जस्टिफाई करती है।
कहानी:- फिल्म की कहानी को उभारने के लिए के. विजयेन्द्र प्रसाद और राजामौली ने किरदारों पर खूब मेहनत की है। फिल्म में दो मुख्य किरदार हैं, जिन्हें जल, जंगल और जमीन की थीम पर कहानी के साथ पिरोया गया है। जिनके किरदारों को इतनी बारीकी से लिखा गया है की दर्शकों को उनसे प्यार हो जाता है। फिल्म में दोनों मुख्य किरदारों की कहानी को अंग्रेजी हुकूमत की जुल्मों से बदला और आज़ादी के लिए संघर्ष करते हुए रामायण और महाभारत के पात्र राम और भीम के रूप पेश किया गया है। जो फिल्म देखते हुए बेहद सच्चे और खूबसूरत लगते हैं।
नया क्या है:- किसी भी फिल्म की कहानी उसके हिट और फ्लॉप होने का मार्ग प्रशस्त करती है। परंतु इस फिल्म की नैय्या कहानी के कमजोर होने के बावजूद भी पार लग जाती है। पहले हाफ में राजामौली साउथ के दोनों बड़े स्टार्स के छोटे-छोटे मगर सुंदर प्रसंगों के सहारे दर्शकों को चमत्कृत और उनका मनोरंजन करते रहते हैं। लेकिन दूसरे हाफ में कहानी ठहर सी जाती है। जिसे देर से मगर फिल्म का क्लाइमैक्स संभाल लेता है। रामचरण भगवान श्रीराम के अवतार में अंग्रेजों पर बाणों की वर्षा करते स्वाभाविक लगते हैं और ये सीन देखने लायक बनता है। फिल्म का क्लाइमैक्स फिल्म के दर्जे, दर्शकों के उत्साह और रोमांच को ऊंचाई प्रदान करता है।
एक्टिंग:- एनटीआर जूनियर और रामचरण ने भीमा और राम राजू के किरदार में अपने करियर की बेस्ट परफॉर्मेंस दी है। अजय देवगन को हिंदी पट्टी के दर्शकों को साधने के उद्देश्य से फिल्म में रखा गया है। जिनकी दमदार अदायगी फ्लैसबैक में काफी देर से पर्दे पर देखने को मिलती है। आलिया भट्ट की एक्टिंग भी दिन ब दिन परिपक्व होती जा रही है। श्रिया सरन अपने छोटे मगर अहम किरदार में बेहद खूबसूरत और प्रभावी लगी हैं। इनके अलावा मार्क बेनिंगटन, ओलिविया मॉरिस, रे स्टीवनसन और एलिसन डूडी ने भी दमदार परफॉर्मेंस दी है।
डायरेक्शन और विजुअल इफेक्ट्स:- के. विजयेन्द्र प्रसाद की औसत कहानी पर एस.एस. राजामौली ने स्क्रीनप्ले इस तरह लिखा है कि फिल्म कहानी के कमजोर पक्ष को छुपा लेती है। छोटे-छोटे इंसीडेंट्स को जादुई कैमेरा वर्क और सम्मोहित करने वाले विजुअल इफेक्ट्स ने फिल्म में जान डाल दी है। निर्देशक के रूप में राजामौली ने कहानी के तात्कालिक भाषा, वेशभूषा और लुक पर ध्यान देने के बजाय प्योर व्यावसायिक फिल्म बनाने की ओर ज्यादा ध्यान दिया है। फिल्म देखते हुए कई जगह ये भी लगता है की 'एंटरटेनमेंट' को 'लॉजिक' पर तरजीह दी गई है।
म्यूजिक:- एम.एम. क्रीम का जलवा शानदार बैकग्राउंड म्यूजिक के रूप में सुना और महसूस किया जा सकता है। गानों की बात करें तो फिल्म का एक गाना "नाचो नाचो" बारात और पार्टी में धमाल मचाने लायक बना है। इस गाने को सुनते हुए लगता है की इसका लिरिक्स और म्यूजिक हिंदी पट्टी के दर्शकों के अनुरूप लिखा और बनाया गया है। साथ ही एक्शन सीन आम साउथ की फिल्मों की तरह नहीं बल्कि सफाई के साथ शूट किए हुए स्वाभाविक लगते हैं।
देखें या नहीं:- राजामौली जैसे निर्देशक ने अपनी पुरानी फिल्मों से दर्शकों के बीच अपने काम का काफी ऊंचा बेंचमार्क सेट किया हुआ है। जिसकी अपेक्षाओं पर ये फिल्म खड़ा नहीं उतरती। या फिर कहें तो राजामौली जैसे डायरेक्टर से जो उम्मीद थी फिल्म उस स्तर तक नहीं पहुंचती। बाकी आपको भव्य फिल्में और उनमें वीएफएक्स जैसा तकनीकी पक्ष लुभाता है साथ ही अगर आप राम को रावण की बजाय अंग्रेजों से लड़ते देखना चाहते है तो आरआरआर आपको निराश नहीं करेगी। फिल्म को 'वन टाइम वॉच' कहा जा सकता है। फिल्म:-आरआरआर निर्देशक:- एस.एस. राजामौली कलाकार:- रामचरण, एनटीआर जूनियर, अजय देवगन, आलिया भट्ट, श्रिया सरन, ओलिविया मॉरिस, रे स्टीवनसन
