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Rahul Devashish
Rahul DevashishCourseLiteraturePoetry
31 May 2021·1 min read·

घर और सफर

रोज निकलता हूँ, घर से, घर की,जरूरतों को पूरा करने के लिये।

सफर करता हूँ, मीलों तक, सफर की,जरूरतों को पूरा करने के लिये।

घर,सफर करने को बेबस करता है,और सफर,घर लौटने को विवश करता है।

© राहुल देवाशीष