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Mithilesh Kumar
Mithilesh KumarCourseLiteraturePoetry
3 Feb 2021·1 min read·

गुस्सा

गुस्सा भी क्या चीज, ऊर्जा 20 गुना बढ़ जाती। गर्मी गरमा का माहौल, लड़ पड़ते चाहे जो हो जाए। सभी समझाते, बचने बचाने की बाते कहते।

जहां बात हो सच्चाई की, लड़ना भी है जरूरी। क्यों डरना, दो ईंट का जवाब पत्थर से। ये कलयुग है, बेईमानी पसारे है पांव जमाए।

कब तक डरोगे भाई, उठो तलवार उठाओ। बन जाओ, झांसी की रानी, जब आन पड़े। महाराणा प्रताप सा, घांस की रोटी खाने तैयार रहो।

गुस्सा भी क्या चीज, ऊर्जा 20 गुना बढ़ जाती। इस ऊर्जा का भी, कर सकते उपयोग हम। पॉजिटिव स्ट्रेस भी है, सहायक लक्ष्य पाने में।

लड़ो यह तो कर्म युद्ध है, करो या मरो। यही है मूल मंत्र, जीवन का, घनघोर कलयुग है। पर सत्य को मत छोड़ो, करो या मरो।

जीवन का यह, तजुर्बा कहता। लोग नहीं देते हक, छिनना पड़ता है। हर चीज के लिए, आवाज उठानी पड़ती है। जहां बात हो सच्चाई की, लड़ना भी है जरूरी।

जीवन तो एक बहती धारा है, इसमें सभी है। लड़ना पड़ता है, पाने को हक अपना। लोग कहते बगावत, कोई कहते ईगो प्रॉब्लम।

सबकी अपनी सोच है, पर मैं कहता हूं। बेफिक्र तू चलता जा, बहला उन्हे, समझा उन्हें। तू कर्म कर, लड़ तू सच्चाई के लिए। छीन अपना हक, जब आन पड़ी तब।

गुस्सा भी क्या चीज, ऊर्जा 20 गुना बढ़ जाती। गर्मी गरमा का माहौल, लड़ पड़ते चाहे जो हो जाए। सभी समझाते, बचने बचाने की बाते कहते।

#truth

©#मिथिलेश कुमार