हमारे बेमिसाल रंग
औरों की नजर में भले बेढंग हैं हम, पर हौंसले और सपनों में क्या किसी से कम हैं हम। जीवन की ये सच्चाई प्यारी है, हर किसी ने अपने ढंग से राह संवारी है।
क्या फर्क पड़ता है किसी के कहने से, हमारे कदम थमे नहीं किसी के ताने से। ये बेढंग ही वो हुनर सिखाएगी, जो दुनिया को नयापन दिखाएगी।
आओ, देखो, जो सच है वो जानेंगे, हमारे रंगों में नया उजाला पहचानेंगे। जो आज हंसते हैं, कल सीखेंगे, हमारी बेढंगी से अपना धंग रचेंगे।
हर चुनौती में नई राह बनाएंगे, अपनी कश्ती को खुद किनारे लगाएंगे। हमारे ढंग की जो बात निराली है, वो ही तो दुनिया के लिए मिसाल बनानी है।
हमें गर्व है अपने इस ढंग पर, हमारा जीवन चमकेगा अपने ही रंग पर। जो हमें समझ न पाए, वो समझ जाएंगे, हमारे बेमिसाल ढंग को वो सर झुकाएंगे।
©योगाचार्य नरेन्द्र प्रसाद निराला
