← PrevNext →
Satish Kumar Pandey
Satish Kumar PandeyCourseLiteraturePoetry
14 Sept 2021·1 min read·

हिन्दी

हिन्दी। हिन्दी विश्व पटल पर अद्वितीय भाषा है । प्रस्फुटित हो रहा हर क्षण जिसमें नई आशा है । जिसमें उतुंगशिखरों तक, उड़ान भरने की अभिलाषा है । जिसके छाँव तले पोषित होने को, सुदूर प्रांत भी प्यासा है । जिसमें मर्यादा पुरुषोत्तम का पौरुष गुंजयमान हुआ । जिसमें लीलाधर का अनुपम गुणगान हुआ । जिसमें पद्मावती के जौहर का बखान हुआ । यही वो भाषा है जिस पर सूर , तुलसी, जायसी और दिनकर को भी अभिमान हुआ । जगत् के मानसपटल पर जिसका, अमिट पहचान है । जिसमें रचित विश्व के महाकाव्यों में रामचरितमानस का स्थान है । जिसके आँचल में उदित हुआ कृषक समाज का महाकाव्य 'गोदान' है । हूकमरानों के समक्ष, अपने हक का जिसमें ऐलान है। हिन्दी सिर्फ भाषा नहीं, बल्कि हमारी पहचान है । हिन्दी सभ्यता, संस्कृति की पहचान और आर्यावर्त की शान है । हिन्दी है तो ही,अपना वतन हिन्दुस्तान है । सहज है, सिरमौर है, ऐसी सुन्दरता न कहीं और है । नजर उठा के देखो ये दुनिया वालों, आने वाला हिन्दी का दौर है । सूनो नाद आने वाले वक्त का जो, गुंजित चहुओर है। हर तरफ प्रथम स्थान दिलाने का हो रहा शोर है ।

©सतीश कुमार पांडेय समस्त देशवासियों को विश्व की सबसे वैज्ञानिक और लोकप्रिय भाषा हिन्दी दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ एवं बधाई।