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Kumar Bhupesh
Kumar BhupeshCourseLiteraturePoetry
29 Mar 2021·1 min read·

होली

आओ दिलों से द्वेषता के भाव खत्म करें । आपसी मनमुटाव दफ्न करें । भूल के सभी वैमनष्य एक दूजे को गले लगाये । रंगों को रंगों से मिला ,नया रंग बनाएँ । प्रेम, उमंग, उत्कर्ष को जीवन का अंग बनाएँ । कुरीतियों के बन्ध सभी तोड़ दे । आओ जीवन को प्रसन्नता के भवसागर में छोड़ दे। आओ रंगों से ले अनुपम संदेश । मिलना हो किसी संग,बिखेरना हो रंग । जल के बूँदों से सीखे,स्वयं में सर्वस्व समाहित करना और स्वयं के कलेवर में ढालना। आओ इस होली प्रेम, समर्पण की सरिता बहाये। मायूस चेहरों की मुस्कान लौटाएँ। खुद भी खिले और दूजे को भी खिलखिलाए । रंगों की बौछार हो, उसमें सराबोर संस्कार हो । संस्कृति और परंपरा का संगम हो अपने अपनों के संग हो । कभी न हो सके धूमिल ,हमसभी के जिन्दगी में ऐसा अमिट रंग हो। आप सभी को रंगों से सराबोर, गुलालो की बौछार, प्रेम, सौहार्द, भाईचारे के पर्व होली उमंग की हार्दिक शुभकामनाएँ एवं बधाई ।

© सतीश कुमार पांडेय